भूले बिछड़े, असहायों और शहीदों के लिए वैदिक ज्योतिष संस्थान ने किया तर्पण अनुष्ठान

भूले बिछड़े, असहायों और शहीदों के लिए वैदिक ज्योतिष संस्थान ने किया तर्पण अनुष्ठान

घर के बुजुर्गो के तिरस्कार एवं श्राद्ध तर्पण न करने से बढ़ रहीं समस्यायें : स्वामी पूर्णानंदपुरी जी महाराज
अलीगढ़: भाद्रपद पूर्णिमा से लेकर आश्विन अमावस्या तक चलने वाले पितृपक्ष का समापन सर्व पितृ अमावस्या के साथ हुआ। इस दौरान गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली वहीं वैदिक ज्योतिष संस्थान के सदस्यों ने भी स्वामी श्री पूर्णानंदपुरी जी महाराज के सानिध्य में श्राद्ध के अंतिम दिन अनूपशहर गंगा घाट पर श्रद्धापूर्वक तर्पण अनुष्ठान किया।

रविवार प्रातः लगभग दस गाड़ियों द्वारा स्वर्ण जयंती नगर स्थित सीजन्स अपार्टमेंट से वैदिक ज्योतिष संस्थान के सदस्य अनूपशहर स्थित जे.पी गंगा घाट के लिए रवाना हुए, 150 सदस्यों के जत्थे ने सर्वप्रथम गंगा में स्नान कर पूज्य गुरु जी का आशीर्वाद लिया तत्पश्चात जौ, काले तिल, दूध एवं अन्य द्रव्यों के साथ वैदिक विधि विधान से स्वामी श्री पूर्णानंदपुरी जी महाराज के सानिध्य में आचार्य गौरव शास्त्री, ऋषि शास्त्री, शिवम शास्त्री, रवि शास्त्री, मनोज मिश्रा, कृष्णा शास्त्री, कपिल शास्त्री आदि आचार्यो ने पूर्वजों के नाम एवं गौत्र से क्रमानुसार तर्पण करवाया।

पूजा के दौरान भक्तों को सम्बोधित करते हुए स्वामी जी ने कहा कि सनातन धर्म में श्रद्धा रखने वाले तमाम उन व्यक्तियों के लिए जिनकी अकाल मृत्यु हुई हो, दिन रात एक करके देश सेवा में शहीद हुए जवान, वृद्धाश्रम में मृत्यु को प्राप्त ऐसे बुजुर्ग जिनके श्राद्ध हेतु संतान नहीं हैं अथवा रोड दुर्घटना में दिवंगत एवं साधु संतो सहित तमाम उन लोगों के लिए जिनका श्राद्ध एवं तर्पण नहीं हो पाता है, उन लोगों के लिए हर वर्ष वैदिक ज्योतिष संस्थान द्वारा यह आयोजन किया जाता है।उन्होंने बताया कि चौरासी लाख योनियों में किसी न किसी रूप में हमारे पूर्वज सदैव हमारी रक्षा करते हैं।

यह बात विज्ञान भी मान चुकी है कि माता और पिता के डीएनए से मिलकर संतति का डीएनए बनता है, इस तरह पितृ हमेशा अपने साथ रहते हैं। श्राद्ध पक्ष के इन दिनों में पितृलोक से पृथ्वी लोक पर भ्रमण हेतु आते हैं। लेकिन आधुनिकता और व्यस्तता के चलते आज हम अपने तौर तरीके और संस्कृति भूलते जा रहे हैं जिसके परिणाम स्वरुप अनेकों कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पितरों के आशीर्वाद से लाभ, हानि, जीवन और मृत्यु के साथ यश और अपयश की प्राप्ति होती हैं। आज कहीं न कही व्यापार,धन,पत्नी,विवाह,संतान को लेकर जो समस्याएं देखने को मिल रहीं हैं उसका कारण घर के बड़े बुजुर्गो का तिरस्कार, पितृ तर्पण, श्राद्ध से दूरी ही है, क्योंकि आजकल व्यक्ति देवताओं को मनाने में लगे हुए हैं और घर के सम्मानित लोगों का निरादर एवं पितरों को भूलते जा रहे हैं। जबकि किसी भी शुभ कार्य हेतु सबसे पहले पितृ पूजा करना लाभदाई माना गया है।

सर्व पितृ अमावस्या के बारे में उन्होंने बताया कि जिन पूर्वजों की मृत्यु की तिथि के बारे में जानकारी नहीं हो वह सर्व पितृ अमावस्या पर जलदान एवं तर्पण कर सकते हैं, यह दिन अपने आप में विशेष महत्व रखता है क्योंकि एक ही दिन में समस्त वंशजों को तृप्त किया जाता है। इस दिन पितृलोक से संपर्क की शक्ति अधिक होती है और इस तर्पण से वंश में सुख, स्वास्थ्य और संतुलन आता है। अमावस्या के दिन सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि में रहते हैं। सूर्य आत्मा का प्रतीक है और चंद्रमा मन का,जब दोनों का संगम होता है, तो यह तिथि आत्मा और मन के मेल का सूचक मानी जाती है। यही कारण है कि यह तिथि पितरों को अर्पण करने के लिए सबसे शुभ और उपयुक्त मानी गई है। तर्पण एवं श्राद्ध के बाद सभी श्रद्धालुओं ने पुनः गंगा स्नान कर भोजन प्रसाद ग्रहण किया। भंडारे का आयोजन शहर के प्रतिष्ठित उद्यमी जितेंद्र गोविल ने किया।

इस अवसर पर शिव नारायण शर्मा, संजय नवरत्न, तेजवीर सिंह, राहुल सिंह, जितेंद्र गोविल, पवन तिवारी, शिव प्रकाश अग्रवाल, गणेश वार्ष्णेय, राहुल नवरत्न, शिवा ठाकुर, शेखर जादौन, कपिल ठाकुर, नवीन चौधरी, धीरू ठाकुर, राहुल जादौन, पंडित कपिल शर्मा, दीप गुप्ता, प्रवीन वार्ष्णेय, भोलू ठाकुर, कमल उपाध्याय, मनोज उपाध्याय, बांके विहारी वार्ष्णेय, सतीश चौधरी, सुमित वर्मा,रविंद्र चौधरी, मुकेश शिवम्, सुमित यादव, सुधांशु गोयल, उमेश वर्मा, दीपक सिंह, मोहित नगाईच, मोहित गुप्ता, अजीत चौहान, नितिन गुप्ता, मधुर मिश्रा, गोलू ठाकुर, निपुण उपाध्याय, सचिन कुमार, लव उपाध्याय समेत अनेकों उपस्थित रहे।

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