24 फरवरी मंगलवार से मांगलिक कार्य रहेंगे प्रतिबंधित

24 फरवरी मंगलवार से मांगलिक कार्य रहेंगे प्रतिबंधित

अलीगढ़ न्यूज़: फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होलाष्टक का आरंभ होता है जो कि होलिका दहन के साथ समाप्त हो जाते हैं। इस बार होलाष्टक 24 फरवरी से प्रारंभ हो रहे हैं और 3 मार्च को होलिका दहन के साथ ही होलाष्टक खत्म हो जाएंगे, इसके साथ ही सूर्य के मीन राशि मे प्रवेश होने से खरमास भी 14 मार्च की मध्यरात्रि से आरंभ हो रहे हैं जो कि 14 अप्रैल तक मान्य रहेंगे। इस दौरान शुभ कार्य तो सम्पन्न कराए जा सकेंगे लेकिन मांगलिक कार्य जैसे ग्रह प्रवेश एवं नवीन प्रतिष्ठान का आरंभ एवं विवाह संस्कार प्रतिबंधित रहेंगे क्योंकि मीन संक्रन्ति मे इन कार्यों को करने से चिंता का कारण बनते हैं।

वैदिक ज्योतिष संस्थान के प्रमुख स्वामी श्री पूर्णानंदपुरी जी महाराज ने होलाष्टक से जुड़ी जानकारी देते हुए कहा कि रंगों का त्योहार होली खुशियों का प्रतीक है, लेकिन इस उल्लास से ठीक पहले प्रकृति और शास्त्र हमें रुकने, ठहरने और आत्मचिंतन करने का संकेत देते हैं, इस समय को होलाष्टक नाम से जानते हैं। होलाष्टक धार्मिक रूप से अशुभ माने जाते हैं, होलाष्टक के दौरान मांगलिक कार्य निषेध माना जाता है।

स्वामी जी के अनुसार ये आठ दिन केवल परंपरा नहीं, बल्कि ग्रहों की चाल और भक्ति की परीक्षा का समय हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक के दौरान नकारात्मक शक्तियां सक्रिय हो जाती हैं, इसलिए होलाष्टक को राक्षसी शक्तियों का समय भी कहा जाता है। होलाष्टक के दौरान व्यक्ति के विचारों पर भी बुरा प्रभाव पड़ जाता है। हिरण्यकश्यप ने होलाष्टक के आठ दिनों के दौरान ही अपने पुत्र प्रह्लाद से विष्णु भक्ति छुड़वाने की कोशिश की थी और प्रह्लाद के न मानने पर अत्यंत प्रताड़ित किया था।

इस बार होली के पर्व पर लगने वाले चंद्र ग्रहण को लेकर स्वामी श्री पूर्णानंदपुरी जी महाराज ने बताया कि भारत में यह ग्रहण दिखाई देने के कारण इसके सूतक मान्य रहेंगे जो कि 9 घंटे पहले से प्रारंभ हो जाते हैं। मान्यता है कि सूतक के दौरान कोई भी शुभकार्य, पूजा-पाठ आदि नहीं किया जाता है,इसलिए होलिका दहन में भी इस बार असमंजस बना हुआ है। वहीं होलिका दहन पर भद्रा काल 3 मार्च मध्यरात्रि 01:25 बजे से प्रातः 04:30 बजे तक करीब 3 घंटे रहेगा। भारतीय समय अनुसार चंद्र ग्रहण 3 मार्च दोपहर 03:20 मिनट से सांय 06:47 मिनट तक रहेगा, इसका सूतक काल प्रातः 6 बजे से ही लग जाएगा, इससे पहले भद्राकाल रहेगा।

पूर्णिमा तिथि एवं होलिका दहन के विषय में स्वामी जी ने बताया कि पंचांग के अनुसार, फाल्गुन महीने की पूर्णिमा तिथि 2 मार्च को सांय 05:55 मिनट से प्रारंभ होकर 3 मार्च को प्रदोष से पूर्व 05:07 मिनट पर समाप्त होगी, इसके साथ ही 2 मार्च को पूर्णिमा के साथ भद्रा लग रही है जो कि अगले दिन 3 मार्च को प्रातः 05:03 मिनट तक रहेगी। चूंकि होलिका दहन भद्रा के मुख को छोड़कर करना चाहिए जो कि 3 मार्च प्रातः 02:37 मिनट से 04:33 मिनट तक रहेगा ऐसे में होलिका दहन 2 मार्च को सांय 06:18 मिनट से अगले दिन 3 मार्च को प्रातः 02:37 मिनट तक उसके बाद 3 मार्च को ही प्रातः 04:33 मिनट से प्रातः 06:46 मिनट तक अर्थात सूर्योदय से पूर्व कर सकते हैं।

Vplnews

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