परंपरा और इष्ट के अनुसार विभाजित है सनातन धर्म : स्वामी पूर्णानंदपुरी जी महाराज
अलीगढ़ न्यूज़: शहर के क्षेत्र लोधा में चल रहे श्री विष्णु लक्ष्मी महायज्ञ एवं श्रीमद भागवत कथा महोत्सव के तहत अंतिम दिन की भागवत कथा में कथा व्यास ने सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष की कथा सुनाई। वहीं महायज्ञ में भी श्रद्धालुओं ने आहुतियाँ दीं।
रविवार को खैर रोड स्थित ग्राम लोधा में वैदिक ज्योतिष संस्थान के प्रमुख स्वामी श्री पूर्णानंदपुरी जी महाराज के सानिध्य में आचार्य गौरव शास्त्री, रवि शास्त्री, विनीत शास्त्री, रामलखन पचौरी, कृष्णा, विवेक आदि आचार्यों ने वैदिक मन्त्रों के साथ 108 कुंडों में आहुतियाँ दिलवायीं।
स्वामी श्री पूर्णानंदपुरी जी महाराज ने इस अवसर पर जानकारी देते हुए कहा कि वैदिक परंपरा के अनुसार धर्मों का वर्गीकरण उनके देवताओं के अनुसार किया गया है। भगवान शिव को मानने वाले शैव, दुर्गा की उपासना करने वाले शाक्त और भगवान विष्णु को मानने वालों को वैष्णव कहा जाता है। उन्होंने स्मार्त और वैष्णव में अंतर बताते हुए कहा कि स्मार्त लोग सभी देवों में अपनी आस्था रखते हैं वह स्मार्त वहीं वैष्णव लोग केवल भगवान विष्णु के उपासक होते हैं। एकादशी तिथि पहले दिन स्मार्त द्वारा वहीं दूसरे दिन वैष्णव सम्प्रदाय के अनुयायियों द्वारा मनायी गयी है।
सांयकालीन बेला में कथा व्यास अतुलकृष्ण ने अंतिम दिन की कथा में परीक्षित मोक्ष की कथा सुनायी उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित को ऋषि श्रृंगी के श्राप के कारण सातवें दिन तक्षक नाग द्वारा डसे जाने का पता चलता है। अपने शेष जीवन के सात दिनों में मोक्ष प्राप्त करने के लिए, वे महर्षि सुखदेव द्वारा सुनाई गई श्रीमद्भागवत कथा सुनते हैं, जो उनके मन को भौतिक संसार से विरक्त कर देती है और उन्हें अंततः मोक्ष प्रदान करती है।

