यज्ञशाला की परिक्रमा से मिटते हैं जन्म जन्मातर के पाप : स्वामी पूर्णानंदपुरी जी महाराज
अलीगढ़: गाँव लोधा में चल रहे श्री विष्णु लक्ष्मी महायज्ञ एवं श्रीमद भागवत कथा सप्ताह के तीसरे दिन विशाल 108 कुण्डीय महायज्ञ में आहुतियों के साथ कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ में प्रहलाद चरित्र, जड़ भरत की कथा, श्रष्टि वर्णन की कथा सुनाई गयी।
रविवार को प्रातः कालीन बेला में यज्ञशाला में उपस्थित मुख्य यजमानों सहित अन्य भक्तों द्वारा वैदिक ज्योतिष संस्थान के प्रमुख स्वामी श्री पूर्णानंदपुरी जी महाराज की अध्यक्षता में आचार्य गौरव शास्त्री, शिवम शास्त्री, रवि शास्त्री, रामलखन पचौरी, कृष्णा शास्त्री आदि विद्वान आचार्यों ने यज्ञशाला के द्वारों का पूजन करवाकर मुख्य चौकी एवं यज्ञ कुंड का पूजन करवाया उसके बाद गणेश आदि देवताओं का आव्हान एवं ध्यान कर वेदमंत्रो पर आहुतियाँ दिलवायीं।
स्वामी पूर्णानंदपुरी जी महाराज ने इस अवसर पर बताया कि यज्ञ नारायण भगवान की पत्नी का नाम स्वाहा और स्वधा है, देवताओं तक आहुतियों के माध्यम से स्वाहा वहीं पितरों की पूजा में स्वधा अपनी बात पहुंचाती हैं। उन्होंने कहा कि यज्ञ शाला में परिक्रमा करने से अनेकों जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है। एक एक पग परिक्रमा से जन्म जन्मातर के पापों से निवृति होती है।
सांयकालीन बेला में हुई श्रीमद भागवत कथा में कथा व्यास आचार्य श्री अतुल कृष्ण जी ने प्रहलाद चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि भक्त प्रहलाद की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान ने अवतार लिया था,अगर प्रहलाद जैसी भक्ति हो तो हर युग में अपने भक्त के लिए भगवान अवतार लेते हैं। कथा में उपस्थित भारी जन समूह ने भजनों पर नृत्य कर पुण्य का लाभ लिया।

