हाथी पर सवार होकर आएंगी देवी दुर्गा, दस दिन होगी देवी की आराधना : स्वामी पूर्णानंदपुरी जी महाराज
अलीगढ़। 15 दिवसीय श्राद्ध पक्ष के समापन के बाद माँ भगवती की आराधना के लिए नौ दिवसीय पर्व यानि शारदीय नवरात्रि सोमवार से प्रारंभ हो रहे हैं। देवी दुर्गा के नौ रूपों के पूजन अर्चन से जुड़े नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना का महत्व है।
वैदिक ज्योतिष संस्थान के प्रमुख स्वामी श्री पूर्णानंदपुरी जी महाराज ने नवदुर्गा पूजा से जुड़ी जानकारी देते हुए कहा कि आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि देर रात्रि 01:23 मिनट से आरंभ हो रही है, जो 23 सितंबर को देर रात्रि 02:55 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के हिसाब से शारदीय नवरात्रि आज से आरम्भ होकर 2 अक्टूबर को समाप्त होगी।इस नवरात्रि में ग्रहों का बहुत ही शुभ संयोग बना हुआ है। बुधादित्य योग,भद्र योग,धन योग (चंद्र मंगल युति तुला राशि में), त्रिग्रह योग (चंद्रमा बुध और सूर्य की युति कन्या राशि में), और गजकेसरी राजयोग का शुभ संयोग रहने वाला है। नवरात्रि के आरंभ में गुरु और चन्द्रमा एक दूसरे से केंद्र भाव में होने के कारण गजकेसरी राजयोग बन रहा है। मिथुन राशि में गुरु और चंद्रमा कन्या राशि में गोचर करने से गजकेसरी राजयोग का निर्माण होगा।
देवी दुर्गा की सवारी दिन के हिसाब से मानी जाती है जिसका प्रभाव शुभ और अशुभ देखने को मिलता है, इस बार सोमवार से प्रारंभ होने वाले नवदुर्गा पर्व में इस बार देवी हाथी पर सवार होकर आएंगी जिससे धन धान्य में बढ़ोत्तरी देखने को मिलेगी। कलश स्थापना मुहूर्त प्रातः 6:09 से 8:06 बजे तक लगभग 1 घंटा 56 मिनट तक तथा अभिजीत मुहूर्त प्रातः 11:49 से 12:38 बजे तक 49 मिनट की अवधि तक रहेगा।

