शुभ योगों में इस बार गणेश जी की आराधना अत्यंत लाभकारी: स्वामी पूर्णानंदपुरी जी महाराज

शुभ योगों में इस बार गणेश जी की आराधना अत्यंत लाभकारी: स्वामी पूर्णानंदपुरी जी महाराज

अलीगढ़ न्यूज़: भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज मनाई जाती है। इसके अगले दिन गणेश चतुर्थी महोत्सव का प्रारंभ होता है। ग्यारह दिनों तक चलने वाले गणेश उत्सव का आरंभ भी इसी दिन होता है। प्रायः प्रत्येक माह कृष्णपक्ष की चतुर्थी को श्री गणेश चतुर्थी का व्रत किया जाता है। इस तरह यह व्रत प्रतिवर्ष तेरह बार मनाया जाता है क्योंकि भाद्रपद में दोनों चतुर्थी में यह व्रत किया जाता है, शुक्लपक्ष में केवल भाद्रपद माह की चतुर्थी को ही पूजा की जाती है।इस बार आज 25 अगस्त दोपहर 12:34 मिनट से तृतीया तिथि प्रारंभ होकर अगले दिन 26 अगस्त दोपहर 01:54 मिनट तक रहेगी। ऐसे में कल हरितालिका तीज मनायी जाएगी।

वैदिक ज्योतिष संस्थान के प्रमुख स्वामी श्री पूर्णानंदपुरी जी महाराज ने गणेश चतुर्थी के विषय में जानकारी देते हुए कहा कि इस बार 27 अगस्त को गणेश चतुर्थी पर्व मनाया जा रहा है,इस दिन प्रीति योग,सर्वार्थ सिद्धि,रवि योग और इंद्र ब्रह्म योग जैसे विशेष योग बन रहे है। इसके अलावा कर्क में ग्रहों के राजकुमार बुध और विलासिता के कारक शुक्र के होने से लक्ष्मी नारायण योग बना हुआ है। वहीं इस तिथि पर बुधवार का महासंयोग होने से यह दिन कुछ विशेष राशि वालों के लिए अत्यंत शुभ रहेगा।

उन्होंने बताया कि भगवान गणेश की पौराणिक कथा के अनुसार गणों के अधिपति एवं प्रथम पूज्य श्री गणेश जी विघ्नहर्ता हैं, और आने वाले सभी विघ्नों को दूर कर देते हैं। शिवपुराण के रुद्रसंहिता खंड के अनुसार माता पार्वती ने अपने शरीर के उबटन से एक बालक की रचना की और उसे द्वारपाल बना दिया, और स्वयं स्नान करने चली गई जब भगवान शिव वापस लौटे और बालक ने उन्हें भीतर जाने से रोक दिया, तब शिव ने युद्ध में अपने गणों की हार के बाद उस बालक का सिर त्रिशूल से काट दिया लेकिन इससे क्रोधित हुई माता की सभी देवताओं ने स्तुति की और तब भगवान शिव ने एक हाथी का मस्तक उस बालक के शरीर पर स्थापित कर दिया इस प्रकार गजानन का जन्म हुआ।

रिद्धि और सिद्धी के स्वामी होने के कारण इनकी कृपा से संपदा और समृद्धि का कभी अभाव नहीं रहता है। गणपति समान रूप से देवलोक, भूलोक और दानव लोक में प्रतिष्ठित हैं। श्री गणेश जी ब्रह्मस्वरूप हैं और उनके उदर में यह तीनों लोक समाहित हैं। इसी कारण इनको लंबोदर कहते हैं। उनके उदर में सब कुछ समा जाता हैं और गणेश जी सब कुछ पचाने की क्षमता रखते हैं।

गणेश जी की प्रतिमा की स्थापना मुहूर्त के विषय में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि गणेश उत्सव के दिन गणपति की पूजा के लिए प्रातः 10:53 से 01:27 बजे तक की अवधि का सर्वोत्तम समय है। 6 सितंबर अनंत चतुर्दशी को श्री गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन होगा।

स्वामी जी ने बताया कि गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा का दर्शन करना अशुभ माना जाता है। इस दिन चंद्रमा के दर्शन करने से किसी न किसी प्रकार के कलंक का सामना करना पड़ता है। 26 अगस्त को सांय 08:29 मिनट तक तथा 27 अगस्त को सांय 08:57 मिनट तक चंद्र दर्शन निषेध है।

Vplnews

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