शक्ति के बिना अधूरे हैं भगवान शिव: स्वामी पूर्णानंद पुरी जी महाराज
अलीगढ़: वैदिक ज्योतिष संस्थान पर चल रहे नव दिवसीय गुप्त नवरात्रि अनुष्ठान के तहत दस महाविद्याओं में से तीसरे दिन की पूजा विधि विधान से की गयी।
शनिवार को स्वामी पूर्णानंदपुरी जी महाराज के सानिध्य में आचार्य गौरव शास्त्री, रवि शास्त्री, आचार्य शिवम शास्त्री आदि आचार्यों ने मुख्य यजमान RG कॉलेज के डायरेक्टर सौरभ वार्ष्णेय, राजस वार्ष्णेय से भगवती की प्रतिमा का पंचामृत से स्नान करवाया और कनेर एवं गुलाब के पुष्पों से ललिता सहस्र नाम से अर्चन करवाया बाद मैं प्रतिदिन की भांति दुर्गा सप्तशती के पाठ किए।
इस अवसर पर स्वामी पूर्णानंदपुरी जी महाराज ने कहा कि वैदिक मान्यताओं के अनुसार शिव और शक्ति एक दूसरे के पूरक हैं और अविभाज्य माने जाते हैं। शिव ब्रह्मांड के संहारक और पुनर्जन्म के देवता हैं, जबकि शक्ति उनकी ऊर्जा और रचनात्मक शक्ति है।शिव और शक्ति को एक ही सत्ता के दो पहलू माना जाता है, जहाँ शिव निष्क्रिय और शक्ति सक्रिय है।
उन्होंने कहा कि शक्ति को ऊर्जा, गति और रचनात्मक शक्ति का प्रतीक माना जाता है।शिव और शक्ति, दोनों मिलकर ही ब्रह्मांड का निर्माण और संचालन करते हैं।शिव शक्ति के बिना निष्क्रिय हैं, और शक्ति शिव के बिना अधूरी है, क्योंकि दोनों एक दूसरे के बिना अपने कार्यों को पूरा नहीं कर सकते।

