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लोकसभा टीवी के वरिष्ठ पत्रकार अनुराग पुनेठा के पिता का निधन

Published: June 5, 2020 at 5:24 pm

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मथुरा- लोकसभा टीवी के वरिष्ठ पत्रकार अनुराग पुनेठा के पिता श्री राजेन्द्र पुनेठा का निधन हृदय गति रुक जाने से गाजियाबाद में हो गया। पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त होने के बाद राजेन्द्र पुनेठा गाजियाबाद में ही अनुराग पुनेठा के पास रह रहे थे।
वरिष्ठ पत्रकार अनुराग पुनेठा की तीन पीढ़ियों का मथुरा से गहरा नाता रहा है।

मूलरूप से उत्तराखंड निवासी अनुराग पुनेठा के दादा श्री जीडी पुनेठा मथुरा के मशहूर शिक्षण संस्थान चम्पा अग्रवाल इंटर कॉलेज में इंग्लिश के लेक्चरर के बाद प्रिंसिपल बने और फिर स्थायी रूप से यही बस गए। कोतवाली क्षेत्र के घीयामंडी अंतर्गत मोहल्ला घाटी बहालराय में उन्होंने अपना निवास बना लिया और जीवन पर्यन्त वहीं रहें।

अनुराग के पिता श्री राजेन्द्र पुनेठा की भी शिक्षा मथुरा में ही पूरी हुई। स्टेट लेबल के फुटबॉल खिलाड़ी राजेन्द्र पुनेठा को उत्तर प्रदेश पुलिस में सेवा करने का मौका मिला। राजेन्द्र पुनेठा ने मथुरा सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों में तैनाती के दौरान विभाग का नाम रोशन किया और कई उपलब्धियां हासिल कीं।

उर्दू भाषा पर अच्छी पकड़ होने के कारण राजेन्द्र पुनेठा को पुलिस महकमे में विशेष सम्मान हासिल था क्योंकि पुलिस विभाग में तफ्तीश करने से लेकर चार्जशीट फ़ाइल करने तक आज भी उर्दू का काफी प्रयोग किया जाता है।

पुलिस अधिकारी के तौर पर राजेन्द्र पुनेठा की तफ्तीश इतनी चर्चित थी कि उनके द्वारा सुलझाए गए कई आपराधिक मामले उस दौर की मशहूर क्राइम पत्रिकाएं ‘सत्यकथा एवं मनोहर कहानियां’ में प्रकाशित हुईं।

राजेन्द्र पुनेठा के सबसे बड़े पुत्र और वर्तमान में लोक सभा टीवी चैनल के वरिष्ठ पत्रकार अनुराग पुनेठा की भी शुरुआती शिक्षा-दीक्षा मथुरा में ही पूरी हुई उसके बाद वह पत्रकारिता से जुड़ गए और विभिन्न मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर रहकर अब लोक सभा टीवी के लिए कार्य कर रहे हैं।

अनुराग के पिता राजेन्द्र पुनेठा की मथुरा व मथुरावासियों के प्रति आत्मियता का अंदाजा इसी बात से ही लगाया जा सकता है कि वह निधन से पहले तक लगातार मथुरा आते रहे और अपने इष्ट-मित्रों, शुभचिंतकों एवं सहयोगियों के हमेशा सम्पर्क में रहे। यही कारण है कि उनके निधन पर जितने शोकमग्न उनके परिजन हैं, उतने ही शोकाकुल मथुरा निवासी भी हैं।

मथुरा से उनके जुड़ाव का ही परिणाम था कि वह यहां आकर हमेशा अपने पैतृक निवास पर ही रुकते थे और आसपास के लोगों के सुख-दुःख में शामिल होते रहे। श्री राजेन्द्र पुनेठा के आकस्मिक निधन की सूचना पाकर मथुरा में काफी लोग व्यथित हैं और उन्हें विभिन्न माध्यमों से श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।







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