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पितृदोषों से मुक्ति दिलाता है सर्व पितृ अमावस्या श्राद्ध : डा. ब्रजेश शास्त्री

Published: October 8, 2018 at 8:37 pm

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वीपीएल न्यूज़, अलीगढ़- पित्रों के लिए समर्पित पावन पितृपक्ष का आखिरी दिन आश्विन माह की कृष्ण अमावस्या (सर्वपितृ श्राद्ध अमावस्या) अनूपशहर के मस्तराम घाट पर पित्रों का तर्पण एवं भंडारे प्रसादी के साथ संपन्न किया गया।

वैदिक ज्योतिष संस्थान के अध्यक्ष एवं महामंडलेश्वर डा.ब्रजेश शास्त्री ने बताया कि श्राद्ध का सरलतम अर्थ सत्य को धारण करना है, और जीवन का सबसे बड़ा सत्य ‘यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे’ है। तैतरीय उपनिषद् के अनुसार मिट्टी से निर्मित इस शरीर के विविध तत्वों का मृत्यु उपरांत ब्रह्मांड में विलय हो जाता है, पर मोह के धागे नहीं छूटते हैं। मरणोपरान्त भी आत्मा में मोह, माया का अतिरेक होता है और यह प्रेम ही उन्हें पितृ पक्ष में धरती पर वंशजों के पास खींचता है।

वैदिक ज्योतिष संस्थान के तत्वावधान में सोमवार को बुलंदशहर जनपद के अनूपशहर स्थित मस्तराम घाट पर पित्रों की प्रसन्नता के लिए सामूहिक तर्पण का आयोजन परम पूज्य गुरुदेव महामंडलेश्वर डा.आचार्य ब्रजेश शास्त्री के सानिध्य में किया गया। कार्यक्रम की प्रातः बेला में तर्पण के लिए आये मुख्य यजमान दलवीर जुनेजा, शशि जुनेजा सहित तमाम जातकों ने गंगा स्नान कर अपने अपने पितरों को स्मरण करते हुए गौरव शास्त्री, ऋषि शास्त्री, दुष्यंत वेदपाठी, वैभव वेदपाठी से विधि विधान से दूध, तिल, जौ आदि से तर्पण करवाया। तत्पश्चात हवन यज्ञ करने के बाद पितरों को शांति देने के लिए और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए गीता के सातवें अध्याय का पाठ किया गया। इस अवसर पर गुरुवर डा.ब्रजेश शास्त्री ने पित्र अमावस्या के बारे में विस्तारित करते हुए बताया बताया कि इस अमावस्या को किया गया श्राद्ध पितृदोषों से मुक्ति दिलाता है।

इस दिन उन सभी पितरों का श्राद्ध या पिंडदान किया जाता है, लोगों की मृत्यु अमावस्या तिथि, पूर्णिमा तिथि और चतुर्दशी तिथि को हुई हो। इसके साथ ही अगर कोई श्राद्ध में तिथि विशेष को किसी कारण से श्राद्ध न कर पाया हो या फिर श्राद्ध की तिथि के विषय में जानकारी के अभाव में सर्वपितृ श्राद्ध अमावस्या पर श्राद्ध किया जा सकता है। ऐसी मान्यता है कि आश्विन कृष्ण पक्ष के 15 दिनों में (प्रतिपदा से लेकर अमावस्या) तक यमराज पितरों को मुक्त कर देते हैं और समस्त पितर अपने-अपने हिस्से का ग्रास लेने के लिए अपने वंशजों के समीप आते हैं, जिससे उन्हें आत्मिक शांति प्राप्त होती है।तर्पण करने के उपरांत सभी जातकों ने गाय, कुत्ते, चींटी, कौआ और देवताओं को पंचबली के साथ ही जे.पी.विश्वविद्यालय से सम्बद्ध जे.पी.संस्कृत विद्यालय के सभी वेदपाठी ब्राहमणों को भोजन कराकर व दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लिया।

इस अवसर पर अतुल भारद्वाज (प्रधानाध्यापक जे.पी.संस्कृत विद्यालय) तेजवीर सिंह जादौन, शिवप्रकाश अग्रवाल, सुमित जुनेजा, अशोक नवरत्न, संजय नवरत्न, अमित जुनेजा, राहुल नवरत्न, भोलू ठाकुर, चंद्रशेखर जादौन, शिव जादौन, राहुल जादौन, अर्चना गुप्ता, कृष्णा जादौन, नवीन चौधरी, कपिल जादौन, सुमंत किशोर सिंह, विक्रम जादौन, नरेंद्र पचौरी, अवधेश शर्मा, गेहराज सिंह आदि उपस्थित रहे।