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विश्व स्पाइन दिवस: न्यूरोसर्जन डॉ नागेश वार्ष्णेय ने “गैट बैक ऑन ट्रैक” का दिलाया संकल्प

Published: October 15, 2020 at 4:28 pm

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अलीगढ़- पूरे विश्व में 16 अक्टूबर को विश्व स्पाइन दिवस मनाया जाता है, इस दिन को रीढ़ की हड्डी से जुड़ी हुई बीमारियों के प्रति जागरूकता बढाने के लिए मनाया जाता है। पूरे विश्व में लगभग 1 अरब लोगों को रीढ की हड्डी में दर्द रहता है और यह दर्द लगभग किसी भी उम्र में हो सकता है। कमर दर्द अपने आप में एक ऐसा कारण है, जिसकी वजह से कई लोग अपना सामान्य काम भी नहीं कर पाते।

जाने माने न्यूरोसर्जन डॉ नागेश वार्ष्णेय ने आशा ब्रेन एंड स्पाइन रामघाट रोड़ पर जानकारी देते हुए बताया कि कमर दर्द के सामान्य कारण- आर्थराइटिस, डिस्क फटना, जन्मजात रीढ की हड्डी टेढा होना, रीढ की हड्डी या नस के ट्यूमर अपनी रीढ की हड्डी का सही से ख्याल रखकर कमर दर्द को दूर रखा जा सकता है। फिर इस समय कोरोना वायरस महामारी की वजह से जो लाॅकडाउन लगा है, इसकी वजह से काफी लोग घर से काम कर रहे हैं, जिससे शारीरिक गतिविधि कम हो गई है, और गर्दन दर्द, कमर दर्द के मामले बढ गये हैं। इसीलिये इस वर्ष की थीम ‘‘गैट बैक आन ट्रैक’’ बनाई गई है।

न्यूरोसर्जन डॉ नागेश वार्ष्णेय ने कहा कि हमारी रीढ़ की हड्डी में लगभग 60 जाॅइन्ट होते हैं और यदि इनके काम में कमी आती है तो रीढ की हड्डी के काम खराब होने लगते हैं। इसलिए शरीर की रेगुलर कसरत जरूरी होती है, जिससे हमारा शरीर सामान्य गतिविधि में रहे। उन्होंने विश्व स्पाइन दिवस पर कहा कि हम सभी संकल्प करें कि हमारी स्पाइन ट्रेक पर रहे और स्वस्थ रहे। इसलिए ऐसी कोई दिक्कत होने पर उचित स्पाइन विशेषज्ञ से सलाह लें।




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