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तर्पण कर लिया पितरों का आशीर्वाद, पितृदोषों से मुक्ति हेतु लाभकर है सर्वपितृ अमावस्या : स्वामी पूर्णानंदपुरी

Published: September 18, 2020 at 10:33 am

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अलीगढ़- पूर्वजों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के कारण ही इन दिनों को श्राद्ध भी कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार जिस तिथि को दिवंगत आत्मा संसार से गमन करके गई थी, आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की उसी तिथि को पितृ शांति के लिये श्राद्ध कर्म किया जाता है। लेकिन समय के साथ कभी-कभी जाने-अंजाने हम उन तिथियों को भूल जाते हैं जिन तिथियों को हमारे प्रियजन हमें छोड़ कर चले जाते हैं। फिर विभिन्न परिजनों की तिथियां अलग-अलग होने से हर रोज समय निकाल कर श्राद्ध करना बड़ा ही कठिन है।

लेकिन शास्त्रों ने कुछ ऐसे भी उपाय निकाले हैं जिनसे आप अपने पूर्वजों को याद भी कर सकें इसलिये अपने पितरों का अलग-अलग श्राद्ध करने की बजाय सभी पितरों के लिये एक ही दिन श्राद्ध करने का विधान बताया गया है इसी क्रम में वैदिक ज्योतिष संस्थान के तत्वावधान में अनूपशहर स्थित मस्तराम घाट पर सर्वपितृ श्राद्ध अमावस्या के पर्व पर पितरो की आत्मशांति हेतु तर्पण का आयोजन किया गया।

गुरूवार को अनूपशहर में स्वामी श्री पूर्णानंदपुरी जी महाराज के सानिध्य में लगभग एक दर्जन जातकों द्वारा प्रातः कालीन बेला में दूध, काले तिल, जौ, चावल आदि से कुशा के माध्यम से उनके पूर्वजों के लिए तर्पण किया गया इस अवसर पर स्वामी पूर्णानंदपुरी जी महाराज ने बताया कि वैसे तो पूर्णिमा से अमावस्या तिथि तक पूर्वजों की आराधना करने का अवसर मिलता है लेकिन आज कल के व्यस्त जीवन की वजह से समय के आभाव के चलते कुछ लोग अपने पितरों की आराधना करने से बंचित रह जाते हैं, इस समस्या से समाधान हेतु आश्विन माह की कृष्ण अमावस्या को जिसे सर्वपितृ श्राद्ध अमावस्या कहते हैं, यह दिन पितृपक्ष का आखिरी दिन होता है पूर्वजों का श्राद्ध करने से पितृदोषों से मुक्ति मिलती है।

इस दिन उन सभी पितरों का श्राद्ध या पिंडदान किया जाता है, जिनकी मृत्यु अमावस्या तिथि, पूर्णिमा तिथि और चतुर्दशी तिथि को हुई हो।इसके साथ ही अगर कोई श्राद्ध में तिथि विशेष को किसी कारण से श्राद्ध न कर पाया हो या फिर श्राद्ध की तिथि मालूम न हो तो सर्वपितृ श्राद्ध अमावस्या पर श्राद्ध किया जा सकता है। तर्पण के पश्चात सभी जातकों द्वारा व्यापारियों के उत्थान हेतु भगवान विश्वकर्मा की पूजा भी करी गयी तत्पश्चात सभी जातकों ने गंगा स्नान करने के पश्चात गुरुदेव से आशीर्वाद लिया और ब्राह्मणों को भोजन करवाकर दक्षिणा भेंट दी।

इस अवसर पर रजनीश वार्ष्णेय, संजय नवरत्न, शिवनारायण शर्मा, डा.राकेश सक्सेना, पवन तिवारी, प्रमोद सिंह, कपिल शर्मा, निपुण उपाध्याय, सी.पी.गुप्ता, प्रमोद वार्ष्णेय, सुमित वर्मा सहित अन्य उपस्थित रहे।




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