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रुद्राभिषेक से होता है साधक में शिवत्व का उदय : स्वामी पूर्णानंदपुरी जी

Published: July 15, 2020 at 5:23 pm

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अलीगढ़- वैदिक ज्योतिष संस्थान के तत्वावधान में अलीगढ क्षेत्र के प्रतिष्ठित सिद्धपीठ खेरेश्वर महादेव मंदिर पर नगर की खुशहाली, शांति सौहार्द के लिए एवं कोरोना जैसी घातक महामारी से बचाव हेतु शिव का रुद्राभिषेक किया गया।

मंगलवार को हरिदासपुर स्थित सिद्धपीठ खेरेश्वर महादेव मंदिर पर वैदिक ज्योतिष संस्थान के अध्यक्ष एवं महामंडलेश्वर स्वामी श्री पूर्णानंदपुरी जी महाराज के पावन सानिध्य में आचार्य गौरव शास्त्री, रवि शास्त्री, ऋषि शास्त्री, शिवम शास्त्री, कपिल शास्त्री आदि आचार्यों ने यजुर्वेद के मन्त्रों के साथ मुख्य यजमान सुबोध अग्रवाल एवं ममता अग्रवाल एवं सुमित अग्रवाल, राधिका अग्रवाल से भगवान भोलेनाथ का दूध, दही, घी, शहद, बूरा, गन्ने के रस, फलोदक, भांग, नारियल, गुलाब जल आदि से अभिषेक कराकर भस्म, चन्दन, रोली से श्रृंगार कर शिव परिवार को वस्त्र अर्पित किये।

रुद्राभिषेक के दौरान मंदिर परिसर में मौजूद भक्तों के बीच स्वामी श्री पूर्णानंदपुरी जी महाराज ने शिव पूजा एवं अभिषेक के महत्व को बताते हुए कहा कि वेदः शिवः, शिवो वेदः” वेद ही शिव हैं और शिव ही वेद हैं। “रुतम्-दु:खम्, द्रावयति-नाशयतीतिरुद्र:” यानि भगवान शिव सभी दु:खों को नष्ट कर देने के कारण ही रूद्र कहलाते है। प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष की प्रतिपदा, अष्टमी, अमावस्या तथा शुक्लपक्ष की द्वितीया व नवमी के दिन भगवान शिव माता गौरी के साथ होते हैं, इस तिथिमें रुद्राभिषेक करने से सुख-समृद्धि उपलब्ध होती है। हमारे धर्मग्रंथों के अनुसार हमारे द्वारा किए गए पाप ही हमारे दु:खों के कारण हैं। रुद्रार्चन और रुद्राभिषेक से हमारे कुंडली से पातक कर्म एवं महापातक भी जलकर भस्म हो जाते हैं और साधक में शिवत्व का उदय होता है तथा भगवान शिव के शुभाशीर्वाद से भक्त के सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। रुद्राभिषेक के उपरांत सभी शिवभक्तों ने भगवान शिव का आशीर्वाद लेकर सर्व समाज की मंगलकामना की।




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