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सोशल डिस्टेंसिंग के साथ मनाया गया गुरु पूर्णिमा महोत्सव

Published: July 5, 2020 at 7:36 pm

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भगवान तक पहुँचने का सहज साधन है गुरु : स्वामी पूर्णानंदपुरी जी महाराज

वीपीएल न्यूज़, अलीगढ़- भारत ऋषियों और मुनियों का देश है जहां पर इनकी उतनी ही पूजा होती है जितना भगवान की। महर्षि वेद व्यास प्रथम विद्वान थे, जिन्होंने सनातन धर्म के चारों वेदों की व्याख्या की थी। हिंदू धर्म में गुरु और ईश्वर दोनों को एक समान माना गया है। गुरु भगवान के समान है और भगवान ही गुरु हैं। गुरु ही ईश्वर को प्राप्त करने और इस संसार रूपी भवसागर से निकलने का रास्ता बताते हैं। गुरु के बताए मार्ग पर चलकर व्यक्ति शान्ति, आनंद और मोक्ष को प्राप्त करता है, यह जानकारी वैदिक ज्योतिष संस्थान के अध्यक्ष एवं परमपूज्य गुरुदेव स्वामी श्री पूर्णानंदपुरी जी महाराज ने गुरुपूर्णिमा महोत्सव के पावन पर्व पर उपस्थित भक्तों के समक्ष दी।

रविवार को सीजंस अपार्टमेंट स्वर्णजयंती नगर स्थित वैदिक ज्योतिष संस्थान कार्यालय पर गुरुपूर्णिमा महोत्सव का आयोजन किया गया जिसमें प्रातः कालीन बेला में महामंडलेश्वर स्वामी श्री पूर्णानंदपुरी जी महाराज के श्री चरणों का आचार्य गौरव शास्त्री, ऋषि शास्त्री, रवि शास्त्री, आचार्य शिवम शास्त्री, माधव वेदपाठी, हर्ष वेदपाठी आदि आचार्यों ने दीक्षित शिष्यों के द्वारा अभिषेक करवाकर एवं चन्दन तिलक लगाकर पुष्पमाला अर्पित की। क्योंकि इस वर्ष कोरोना जैसी वैश्विक आपदा के चलते एक साथ सामूहिक कार्यक्रम करना सरकार द्वारा दी गयी गाइड लाइन के विरुद्ध है गुरुपूजन के लिए सुबह से ही शहर से आने वाले भक्तों का ताता लगा रहा जिनकी थर्मल स्क्रीनिंग एवं सेनीटाईज कर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए वेटिंग रूम में क्वारंटाइन करवाकर एक साथ केवल पांच लोगों को ही गुरुपूजन की अनुमति प्रदान की गयी।

इस अवसर पर महाराज श्री पूर्णानंदपुरी जी ने गुरु के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का बहुत ऊंचा और आदर का स्थान है। माता-पिता के समान गुरु का भी बहुत आदर रहा है और वे शुरू से ही पूज्य समझे जाते रहे है। गुरु को ब्रह्मा, विष्णु, महेश के समान समझ कर सम्मान करने की पद्धति पुरातन है। ‘आचार्य देवोभवः’ का स्पष्ट अनुदेश भारत की पुनीत परंपरा है और वेद आदि ग्रंथों का अनुपम आदेश है। ऐसी मान्यता है कि हरिशयनी एकादशी के बाद सभी देवी-देवता चार मास के लिए सो जाते है। इसलिए हरिशयनी एकादशी के बाद पथ प्रदर्शक गुरु की शरण में जाना आवश्यक हो जाता है, गुरु एक तरह का बांध है जो परमात्मा और संसार के बीच और शिष्य और भगवान के बीच सेतु का काम करते हैं, कार्यक्रम के उपरांत स्वामी जी ने चंदन लगाकर सभी भक्तों को फल एवं पैकेट बंद लस्सी व मास्क वितरित किये।

इस अवसर पर रजनीश वार्ष्णेय, नेहा गुप्ता, उषा उपाध्याय, सुरभि उपाध्याय, उपेन्द्र उपाध्याय, शुभम उपाध्याय, पुनीत पाठक,नितिन माहेश्वरी, तृप्ति माहेश्वरी, पवन तिवारी, निकिता तिवारी, प्रमोद गुप्ता, शशि गुप्ता, गणेश वार्ष्णेय, पुनीत अग्रवाल, संजीव गौड़, प्रमोद सिंह, कपिल शास्त्री, आयुषी अग्रवाल, ध्रुव अग्रवाल, सार्थक अग्रवाल, हर्ष अग्रवाल, संजीव अग्रवाल, पारुल अग्रवाल, आशीष अग्रवाल, शालू अग्रवाल आदि लोगों ने गुरु जी का आशीर्वाद लिया।




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