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विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस- सिर दर्द को हल्के में नहीं लेना चाहिए: न्यूरोसर्जन डॉ नागेश वार्ष्णेय

Published: June 7, 2020 at 10:48 am

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वीपीएल न्यूज़, अलीगढ़- कुछ दिनों पहले एक 40 वर्षीय महिला क्लिनिक पर आई, जिनको पिछले 3 से 4 महीने से सिर दर्द की शिकायत थी। परिजन वजाय किसी उचित न्यूरो चिकित्सक के दिखाने के जगह मेडिकल स्टोर से दर्द की दवा लाकर खिलाते रहे। जब समस्या ज्यादा बढ़ गयी, तब लेकर आये तो जांच कराई गई। सीटी स्कैन करने पर पता चला कि ब्रेन ट्यूमर की बीमारी बनी हुई थी। सारी बात समझा कर आपरेशन किया गया। ट्यूमर मेनिंनजीओमा था, अब मरीज एकदम बढ़िया है। तो इस तरह सिर दर्द को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है।

आशा ब्रेन एंड स्पाइन सेंटर रामघाट रोड के वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ नागेश वार्ष्णेय ने यह जानकारी देते हुए बताया कि प्रत्येक साल 8 जून को लोगो में इस बीमारी की जागरूकता के लिए वर्ष 2000 से विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस मनाया जाता है। प्रति वर्ष लगभग प्रति लाख में से 9 से 14 लोगो को ब्रेन ट्यूमर की बीमारी हो सकती है। दी लैंसेट जर्नल के 1990 से 2016 के अध्ययन में पाया गया कि पूरे विश्व में सबसे ज्यादा ऐसे केस चीन, अमेरिका और भारत में पाए गए। प्रति वर्ष इस बीमारी का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है।

डॉ नागेश वार्ष्णेय ने बताया कि मस्तिष्क की कुछ कोशिकाएं अनियंत्रित तरह से बढ़ने लगती हैं, इसी को ब्रेन ट्यूमर कहते है। यह सामान्यत 2 तरह के होते हैं। 1. बिनाइन – धीमी रफ्तार से बढ़ने वाले 2. मैलिग्नेंट – बहुत तेजी से बढ़ने वाले। इसके लक्षण सिर दर्द, दौरे पड़ना, उल्टियां, निगाह में कमजोरी, बोलने में दिक्कत, याददाश्त में कमी, सुनने में कमी, मानसिक लक्षण, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी आना इत्यादि हैं। उन्होंने बताया कि ब्रेन ट्यूमर के कारण बहुत स्पेसिफिक नहीं हैं, कुछ केसों में पुरानी रेडिएशन का इतिहास या आनुवांशिक पाए गए हैं।

डॉ नागेश वार्ष्णेय ने जानकारी देते हुए बताया कि इसकी जाँच सीटी स्कैन, एमआरआई आदि होती है और इसका उपचार सामान्य सर्जरी, कंप्यूटर आधारित स्टेरोटेक्टिक सर्जरी, एंडोस्कोपिक सर्जरी, किमोथेरेपी, रेडियो सर्जरी, गामा नाइफ सर्जरी, जीन थिरेपी, इम्मयून थिरेपी,ओंकोलीटिक वायरस थिरेपी हैं। लेकिन इलाज का तरीका इस बात पर निर्भर करता है कि बीमारी मस्तिष्क के किस हिस्से में है और कितनी बड़ी है।

Visualse – एम आर आई गाइडेड लेज़र ablation नई तकनीक है। इस तकनीक का उपयोग अभी कुछ देशों में ही हो रहा है। पिछले साल ही इस तकनीक का प्रशिक्षण डॉ नागेश वार्ष्णेय एथेंस, ग्रीस से लेकर आये हैं। इस साल भी अन्य प्रशिक्षण के लिया जेनेवा, स्विट्जरलैंड जाना था, किन्तु कोरोना महामारी के कारण स्थगित हो गया।

इस तकनीक में सिर की हड्डी में बीमारी के अनुसार जगह निश्चित करके 4 मिमी का छेद करके 2 मिमी का लेज़र वायर डाल दिया जाता है और एम आर आई में देखते हुए कुछ तरंगों से ट्यूमर को जला दिया जाता है। इसमें मरीज को पूरा बेहोश करने की जरूरत नहीं पड़ती।

डॉ नागेश ने मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के उपाय भी बताए।

1. नींद पूरी लें।
2.नियमित व्यायाम करें।
3.व्यसनों से दूर रहें।
4.तनाव न रखें।
5.पौष्टिक और संतुलित आहार लें।
6. जंक फूड से दूर रहें।
7.पानी का उचित मात्रा में सेवन करें।
8.जरूरत पड़ने पर उचित चिकित्सक से सलाह लें।







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