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शंकराचार्य ने सनातन संस्कृति सहित किया धर्म का प्रचार : स्वामी पूर्णानंदपुरी

Published: April 28, 2020 at 8:22 pm

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वीपीएल न्यूज़, अलीगढ़- शंकराचार्य के द्वारा दिए गए उपदेश आत्मा और परमात्मा की एकरूपता का वर्णन और दर्शन कराने के लिए बने हैं। उन्होंने मानव समुदाय को बताया की परमात्मा एक ही समय पर सगुण और निर्गुण दोनों ही स्वरूपों में धरती पर विद्यमान हैं, उन्होंने सनातन धर्म की रक्षा एवं प्रचार एवं प्रसार हेतु सम्पूर्ण जीवन को लगा दिया। यह जानकारी शंकराचार्य जयंती पर वैदिक ज्योतिष संस्थान के अध्यक्ष ने शंकराचार्य जी की प्रतिमा के पूजन अर्चन के दौरान दी।

वैदिक ज्योतिष संस्थान के तत्वावधान में जगद्गुरु आदि शंकराचार्य का आविर्भाव दिवस मंगलवार को स्वर्ण जयंती नगर सीजंस अपार्टमेंट स्थित संस्थान कार्यालय पर महामंडलेश्वर स्वामी श्री पूर्णानंदपुरी जी महाराज की अध्यक्षता में आचार्य गौरव शास्त्री, कपिल शास्त्री, मनोज वेदपाठी, हर्ष वेदपाठी आदि ने शंकराचार्य की प्रतिमा का पूजन अर्चन कर उनकी प्रतिमा पर पुष्पमाला अर्पित की।

इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी पूर्णानंद पूरी जी महाराज ने आदि गुरु शंकराचार्य के विषय में जानकारी देते हुए कहा कि आदि शंकराचार्य का भारतीय सनातन परंपरा के विकास, प्रचार व प्रसार में अहम योगदान रहा है, जब सनातन धर्म पर संकट आया तो उन्होंने अद्वैतवाद सिद्धांत को मजबूत करते हुए देश के चारों कोने पर सनातन धर्म के रक्षक शंकराचार्य पीठ की स्थापना की और उनके द्वारा धर्म की रक्षा के लिए जलाये गए दीप से ही सनातन धर्म प्रकाशित हो रहा है, चार मठों से ही गुरु-शिष्य परम्परा का निर्वाह होता है। चार मठों के संतों को छोड़कर अन्य किसी को गुरु बनाना हिंदू संत धारा के अंतर्गत नहीं आता।

शंकराचार्य जी ने इन मठों की स्थापना के साथ-साथ उनके मठाधीशों की भी नियुक्ति की, जो बाद में स्वयं शंकराचार्य कहे जाते हैं। जो व्यक्ति किसी भी मठ के अंतर्गत संन्यास लेता हैं वह दसनामी संप्रदाय में से किसी एक सम्प्रदाय पद्धति की साधना करता है। तत्पश्चात शंकराचार्य जी की प्रतिमा के समक्ष आरती कर प्रसाद वितरित हुआ।




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