Menu

धर्म रक्षार्थ परशुराम ने दिया श्री कृष्ण को सुदर्शन : स्वामी पूर्णानंद

Published: April 25, 2020 at 9:44 pm

nobanner
Print Friendly, PDF & Email

वीपीएल न्यूज़, अलीगढ़- वैशाख शुक्ल तृतीया को नर नारायण, हयग्रीव व परशुराम अवतरित हुए थे। इस दिन ही त्रेता युग का भी आरंभ हुआ। परशुराम भगवान विष्णु का 6वां अवतार भी माना जाता है। उनका जन्म महर्षि भृगु के पुत्र महर्षि जमदग्नि द्वारा सम्पन्न पुत्रेष्टि यज्ञ से प्रसन्न देवराज इंद्र के वरदान स्वरूप पत्नी रेणुका के गर्भ से वैशाख शुक्ल तृतीया को मध्यप्रदेश के इंदौर जिला में ग्राम मानपुर के जानापाव पर्वत में हुआ था। वे भगवान विष्णु के आवेशावतार थे। पितामह भृगु द्वारा सम्पन्न नामकरण संस्कार के अनन्तर राम कहलाए। वे जमदग्नि का पुत्र होने के कारण जामदग्न्य और शिवजी द्वारा प्रदत्त परशु धारण किए रहने के कारण वे परशुराम कहलाए उक्त जानकारी वैदिक ज्योतिष संस्थान के प्रमुख स्वामी पूर्णानंद पुरी जी महाराज ने संस्थान पर परशुराम पूजन के दौरान कहीं।

स्वामी जी ने अन्य दृष्टांत देदे हुए कहा कि त्रेतायुग में भगवान राम ने जब शिव धनुष को तोड़ा तो परशुराम जी महेंद्र पर्वत पर तपस्या में लीन थे। लेकिन जैसे ही उन्हें धनुष टूटने का पता चला तो क्रोध में आ गए। लेकिन जब उन्हें प्रभु श्रीराम के बारे में मालूम हुआ तो उन्होंने श्रीराम को प्रणाम किया। बाद में श्रीराम ने परशुराम जी को अपना सुदर्शन चक्र भेट किया और बोले द्वापर युग में जब उनका अवतार होगा तब उन्हें इसकी जरूरत होगी।

इसके बाद जब भगवान श्रीकृष्ण ने द्वापर में अवतार लिया तब परशुरामजी ने धर्म की रक्षा के लिए भगवान श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र वापिस कर दिया। वैदिक ज्योतिष संस्थान कार्यालय पर गौरव शास्त्री जी ने वेद मंत्रों के साथ भगवान परशुराम की प्रतिमा को दूध, दही, घी, शहद, बूरा, गंगाजल, गुलाबजल से अभिषेक कर भोग, आरती कर भव्य पूजन किया।




यूपी: देर रात हिस्ट्रीशीटर को दबोचने गई टीम पर बदमाशों ने बरसाईं गोलियां, सात पुलिसकर्मी जख्मी