Menu

तर्पण कर किया पितरों को प्रसन्न, सुख समृद्धि वैभव के अधिष्ठात्र होते हैं पितृ : स्वामी पूर्णानंदपुरी जी

Published: September 28, 2019 at 10:20 pm

nobanner
Print Friendly, PDF & Email




वीपीएल न्यूज़, अलीगढ़- “पूर्वज पूजा” की प्रथा विश्व के अन्य देशों की अपेक्षा हमारे भारत देश में बहुत प्राचीन है, यह प्रथा यहाँ वैदिक काल से प्रचलित रही है, विभिन्न देवी देवताओं को संबोधित वैदिक ऋचाओं में से अनेक पितरों तथा मृत्यु की प्रशस्ति में गाई गई हैं। इसी प्रथा को जीवित रखते हुए वैदिक ज्योतिष संस्थान के तत्वावधान में अनूपशहर स्थित गंगा घाट पर महामंडलेश्वर स्वामी श्री पूर्णानंदपुरी जी महाराज के पावन सानिध्य में सर्व पितृ अमावस्या के पावन पर्व पर आस पास के जनपदों के सैकणों व्यक्तियों ने तर्पण कर अपने पितरों का आशीर्वाद लिया।

शनिवार को बुलंदशहर शहर जिले के अनुपशहर स्थित गंगा घाट के समक्ष सर्प पितृ अमावस्या पर वैदिक ज्योतिष संस्थान द्वारा सामूहिक तर्पण अनुष्ठान का आयोजन किया गया जिसमे जिन व्यक्तियों के द्वारा श्राद्ध पक्ष में अपने पित्रों का श्राद्ध करना रह गया था उन सभी भक्तों से आचार्य गौरव शास्त्री, रवि शास्त्री, ऋषि शास्त्री, दुष्यंत वेदपाठी, माधव वेदपाठी, वैभव वेदपाठी आदि आचार्यों ने दूध, काले तिल, जौ, कुशा आदि से दर्जनों भक्तों के द्वारा उनके पूर्वजों का तर्पण एवं पूजा करवाई।

इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी श्री पूर्णानंदपुरी जी महाराज ने श्राद्ध के विषय में जानकारी देते हुए बताया कि श्राद्धसंस्कारों की महत्ता परिलक्षित होती है। मृत्युपरांत पितृ-कल्याण-हेतु पहले दिन दस दान और अगले दस ग्यारह दिन तक अन्य दान दिए जाने चाहिए। इन्हीं दानों की सहायता से मृतात्मा नई काया धारण करती है और अपने कर्मानुसार पुनरावृत्त होती है। पितृपूजा के समय वंशज अपने लिये भी मंगलकामना करते हैं।

प्रथम दस दानों का प्रयोजन मृतकों का अध्यात्मनिर्माण है। मृत्यु के 11वें दिन एकोद्दिष्ट नामक दान दिया जाता है अगले दो मास में प्रत्येक मास एक बार और अगले 12 मासों में प्रत्येक छह मास की समाप्ति पर एक अंतिम दान द्वारा इन संस्कारों की कुल संख्या 16 कर दी जाती है। श्राद्ध संस्कारों के संपन्न हो जाने पर पहला शरीर नष्ट हो जाता है और आगामी अनुभवों के लिये नए शरीर का निर्माण होता है। अंत में जे.पी.विश्वविद्यालय में संस्कृत विद्यालय के प्राचार्य अतुल भारद्वाज एवं संदीप वेदपाठी सहित अन्य आचार्यों के द्वारा विद्यालय में उपस्थित छात्रों को फल वितरित किये।

इस अवसर पर रजनीश वार्ष्णेय, शिवनारायन शर्मा, दलवीर जुनेजा, रोहिणी जुनेजा, अशोक नवरत्न, संजय नवरत्न, अनूप कुमार गुप्ता, पवन नवरत्न, तेजवीर सिंह, पवन तिवारी, प्रमोद सिंह, रवेन्द्र सिंह, शीलेन्द्र सिंह, निपुण उपाध्याय, राहुल नवरत्न, एस.पी.सिंह, गणेश वार्ष्णेय, कपिल शर्मा, अजय कुमार वार्ष्णेय, महिपाल सिंह, रवेन्द्र चौधरी, श्याम शर्मा, प्रवीन वार्ष्णेय,वीरपाल सिंह, रेशमपाल सिंह, प्रेमपाल सिंह, ओमपाल सिंह, अमरपाल सिंह आदि उपस्थित रहे।






Leave a Comment

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>