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नवरात्रि- सर्वार्थ सिद्धि योग में करें कलश स्थापना : स्वामी पूर्णानंदपुरी जी

Published: September 28, 2019 at 10:10 pm

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वीपीएल न्यूज़, अलीगढ़- श्राद्ध या पितृ पक्ष के खत्म होते ही रविवार यानि 29 सितंबर से माँ जगत जननी जगदम्बा की भक्ति का महापर्व शारदीय नवरात्र प्रारंभ हो रहा है। हिंदू धर्म में नवरात्र का बहुत बड़ा महत्व बताया गया है। इस बार नवरात्र में सर्वार्थसिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग एकसाथ पड़ने के कारण बेहद दुर्लभ शुभ संयोग बन रहा है और साथ ही इस बार माता के भक्तों को मां की उपासना करने के लिए पूरे नौ दिनों का समय मिलेगा। जिसमें 2 दिन सोमवार पड़ेगा जो कि बेहद शुभ माना जा रहा है। नवरात्र के विषय में जानकारी देते हुए वैदिक ज्योतिष संस्थान के अध्यक्ष एवं परम पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी श्री पूर्णानंदपुरी जी महाराज ने नवरात्रि पर्व की जानकारी दी।

घट स्थापन मुहूर्त को लेकर परम पूज्य गुरुदेव स्वामी श्री पूर्णानंदपुरी जी महाराज ने बताया कि नवरात्रि में मां दुर्गा की उपासना हेतु कलश की स्थापना करना अत्यंत शुभ माना गया है, यदि यह स्थापन शुभ मुहूर्त में किया जाये तो निश्चित ही माता अपना आशीर्वाद प्रदान कर मनोवांछित फल का वरदान देतीं हैं। हस्त नक्षत्र से युक्त अश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा कलश स्थापना के लिए सर्व मंगलकारी है, 28 सितंबर की रात 11:14 बजे से हस्त नक्षत्र प्रारंभ हो चुका है जो रात 9:40 बजे तक रहेगा अतः आज यानि रविवार को ब्रह्म मुहूर्त से सांय 2:08 बजे तक एक साथ ब्रह्म, सर्वार्थ सिद्धि एवं अमृत योग है अतः इस समय कलश स्थापना करना अत्यंत शुभ रहेगा। इसके अलावा जो भक्त सुबह कलश स्थापना न कर पा रहे हो उनके लिए दिन में 11 बजकर 48 मिनट से लेकर 12 बजकर 35 मिनट तक का समय कलश स्थापना के लिए शुभ रहने वाला है।

कलश स्थापन विधि की जानकारी देते हुए परमपूज्य स्वामी जी ने बताया कि एक परात को भली भाँती धोकर उसमें रोली से सतिया बनाकर बालू व जौ को गंगाजल की सहायता से मिलाये, मिटटी के घड़े में गंगाजल भरकर पाँच कमलगट्टे, एक चांदी का सिक्का, तीन सुपारी, नौ लौंग के जोड़े, तीन हल्दी की गाँठ, तीन इलायची, थोड़ी दुर्वाघास घड़े में डालकर घड़े की गर्दन पर कलावा बाँधे। रोली से घड़े पर तीन सतिये बनाये । सकोरे में चावल भरकर चारो और अशोक के पत्ते लगाकर घड़े पर रखे। सकोरे में नारियल रखकर ऊपर से चुनरी उड़ा दे। जनेऊ पहनाये। नारियल पर रोली से टीका करे व चावल चढ़ाये और फूलमाला पहनाये।इस बार शारदीय नवरात्र पर किसी भी तिथि का क्षय न होने के कारण नवरात्र 9 दिन के ही रहेंगे।






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