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पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण, बाल स्वास्थ्य कल्याण व कुष्ठ रोग विभाग का एक दिवसीय प्रशिक्षण सम्पन्न

Published: September 28, 2019 at 10:01 pm

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वीपीएल न्यूज़, अलीगढ़- पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम एवं राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कल्याण व राष्ट्रीय कुष्ठ रोग विभाग का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शनिवार को आयोजित किया गया।

नोडल अधिकारी डॉ खानचंद्र ने प्रकाश डालते हुए बताया कि राष्‍ट्रीय कुष्‍ठ रोग उन्‍मूलन कार्यक्रम सन 1955 में सरकार द्वारा शुरू की गयी एक योजना है। इस कार्यक्रम को विश्व बैंक की सहायता से 1993-94 से [1] बढ़ाकर 2003-04 तक कर दिया गया और इसका उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य से 2005 तक कुष्ठ उन्मूलन था और इस 1,10,000 की संख्या को कम करना था।

उन्होंने बताया कि एनएलईपी को राज्य /ज़िला स्तर पर विकेंद्रीकृत किया गया और कुष्ठ रोग सेवाओं को 2001-2002 के बाद सामान्य देखभाल प्रणाली के साथ एकीकृत किया गया। इससे कुष्ठ (पीएएल) से प्रभावित व्यक्तियों के कलंक और भेदभाव को कम करने में मदद मिली। मल्टी ड्रग थेरेपी (एमडीटी) सभी उपकेंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सरकारी अस्पतालों और औषधालयों में सभी कार्य दिवसों पर निःशुल्क प्रदान की जा रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की शुरूआत के बाद कुष्ठ कार्यक्रम भी मिशन का अनिवार्य हिस्सा रहा है।

दूसरी तरफ सयुंक्त क्रियान्वन के तहत आरबीएसके के सभी चिकित्साधिकारी व मोबाइल टीम का पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम की एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन मलखान सिंह जिला अस्पताल के सभागार में सम्पन्न हुई जहां मास्टर ट्रेनर जिला कार्यक्रम समन्वयक सतेंद्र कुमार ने प्रशिक्षण दिया।

जिला कार्यक्रम समन्वयक सतेंद्र कुमार ने कार्यशाला में बताया कि अब सभी शहरी स्वास्थ्य केंद्रों पर डीएमसी स्थापित होनी है जिसके तहत एनयुएचएम के साथ मिलकर टीबी मरीजो को ढूंढकर उनका इलाज सयुंक्त रूप से करना है। जिसके लिए सभी स्टाफ का प्रशिक्षित होना जरूरी है जिससे 2025 तक भारत को टीबी फ्री करने का सपना मा प्रधानमंत्री का साकार हो सके। साथ ही निक्षय पोषण अभियान के तहत प्रत्येक टीबी मरीज(पब्लिक एवं प्राइवेट) को प्रति माह 500 रुपये पोषण के तहत दिए जा रहे हैं। जिसके तहत मरीज को उक्त राशि सीधे बैंक खाते में डीबीटी के जरिये दी जा रही है।

जिला कार्यक्रम समन्वयक सतेंद्र कुमार ने बताया कि प्रत्येक त्रैमास में एक्टिव केस फाइंडिंग का कार्यक्रम पूरे देश में चलाया जा रहा है ताकि टीबी मरीजों को खोजकर उनको जल्द इलाज पर रख लिया जाये। साथ ही प्रत्येक मरीज को टीबी निकलने पर सीबी नाट से निःशुल्क जांच अनिवार्य है और अब प्राइवेट क्षेत्र से भी मरीजों की जानकारी समय से दी जा रही है साथ ही बताया कि एक्टिव केस फाइंडिंग कार्यक्रम के दौरान ज्यादा टीबी मरीजों को खोजेंगे और जब वो इलाज पर आ जायेंगे तो टीबी को बढ़ने से रोका जा सकता है।

प्रशिक्षण कार्यशाला में आरबीएसके नोडल अधिकारी डॉ एसपी सिंह, आरबीएसके के मैनेजर मुनाजिर के साथ सभी चिकित्साधिकारी व मोबाइल टीम इधर जिला क्षय रोग केंद्र से पीपीएम कोर्डिनेटर पीयूष अग्रवाल के अलावा जिला क्षय रोग केंद्र, कुष्ठ विभाग, आरबीएसके अलीगढ़ का स्टाफ मौजूद रहा।






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