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शांति को चाइल्डलाइन के सहयोग से मिला परिवार

Published: September 13, 2019 at 4:55 pm

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वीपीएल न्यूज़, अलीगढ़- उड़ान सोसायटी द्वारा संचालित चाइल्डलाइन के सहयोग से चौदह मई को अलीगढ़ में भटकती मिली बालिका शांति पुत्री स्वर्गीय सनातन निवासी गांव मझिगडिया ब्लॉक कपटीपाड़ा, जिला मयूरभंज ओडिसा को अपना परिवार मिल सकेगा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार इसी वर्ष चौदह मई को ज्वालापुरी पुलिस चौकी के निकट बदहवास अवस्था में एक बालिका पड़ी हुई थी। उसके पैर सूजे हुए थे एवम् भूख प्यास के कारण दिमागी स्थिति भी ठीक प्रतीत नहीं हो रही थी। वहां पास से गुजर रहे समाजसेवी देवेश एवम् नरेंद्र व्यास ने इसकी सूचना चाइल्डलाइन के निदेशक ज्ञानेंद्र मिश्रा को दी। बालिका को वहां से थाना क्वार्सी ले जाकर चाइल्डलाइन के टीम सदस्य बॉबी ने अपनी सुपुर्दगी में ले लिया। बालिका ने अपना नाम शांति बताया।

चाइल्डलाइन द्वारा अगले दिन शांति को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया। बाल कल्याण समिति के आदेशानुसार बालिका का आयु परीक्षण तथा प्रेग्नेंसी टेस्ट करा पुनः चौबीस मई को समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। समिति ने बालिका के बेहतर हित को देखते हुए उसे प्रगति सेवा संस्थान, कानपुर भेजने का आदेश दिया। दो दिन उपरांत चाइल्डलाइन की टीम बालिका को कानपुर छोड़ कर आयी। प्रगति सेवा संस्थान की निदेशक कल्पना सिंह ने शांति को अस्पताल में भर्ती कराया जहां पंद्रह दिनों के उपचार के उपरांत उसने अपना पता ओडिसा राज्य में बताया। शांति ने कानपुर में एक पुत्र को भी जन्म दिया।

ठीक हो जाने के उपरांत प्रगति सेवा संस्थान से पांच सितंबर को उसे वापस अलीगढ़ चाइल्डलाइन की टीम अपनी सुपुर्दगी में ले आयी। इसके उपरांत बाल कल्याण समिति अलीगढ़ ने बालिका को उसके घर भेजने का आदेश चाइल्डलाइन को दिया। आज चाइल्डलाइन के टीम सदस्य भारत सिंह एवम् बॉबी उसे लेकर मयूरभंज बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत हुए जहां अध्यक्ष कृष्णा कल्पना मोहंती सहित सभी सदस्यों ने शांति को अपने संरक्षण में लेकर उसकी मां तुंगु हो की सुपुर्दगी में दे दिया।

शांति की मां के अनुसार लगभग एक वर्ष पूर्व उसे उत्तर प्रदेश का रहने वाला प्रेम शंकर काम दिलाने के लिए दिल्ली लेकर गया था। तब से लेकर परिवार का शांति से कोई संपर्क नहीं था। गरीब आदिवासी परिवार से ताल्लुक रखने वाली शांति चार बहनों में तीसरे नंबर की है। उसके पिता का देहांत लगभग तेरह वर्ष पूर्व हो चुका है। ग़रीबी के कारण ही मां ने शांति को रोजगार की तलाश में प्रेम शंकर के साथ भेज दिया था।