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स्थाई लोक अदालत ने सेवानिवृत्त होने के तीन साल बाद दिलाया जीपीएफ़

Published: June 28, 2019 at 10:59 pm

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वीपीएल न्यूज़, अलीगढ़- इसे विडंबना ही कहा जायेगा कि जिस विभाग को सेवानिवृत्त होने तक सेवायें दी हो, वहीं से व्यक्ति को सेवानिवृत्त होने के तीन साल बाद उसके फण्ड का रुपया न्यायालय की सहायता से मिले। जी हां अधिकतर सरकारी महकमों का यही हाल है कि जो कार्य स्वयं नियमानुसार होने चहिये वह नहीं होते। इसी कारण आम व्यक्ति को अदालत की शरण लेनी पड़ती है।

आपको बताते चले कि लियाक़त अली निवासी पीर बहादुर डाक खाना तहसील थाना अतरौली, जो 31 मार्च 2015 को शिक्षा विभाग से प्रधानाध्यापक के पद से सेवानिर्वत हो गए। रिटायरमेंट के बाद जो सामुहिक बीमा धनराशि उनके खाते से कटती रही उसका रूपया उनको रिटायरमेंट के बाद भी प्राप्त नही हुआ। जिसके लिए वह लगातार वित्त एवं लेखाधिकारी, बेसिक शिक्षा अलीगढ़ के कार्यलय में सम्पर्क करते रहे।

इसके अतिरिक्त बेसिक शिक्षा सचिव उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ एवम बेसिक शिक्षा सचिव इलाहाबाद के शिकायत पोर्टल पर शिकायत करते रहे, परन्तु कोई सुनवाई नही हुई। फिर निराश होकर उन्होंने स्थायी लोक अदालत के द्वार खटखटाये। स्थायी लोक अदालत के माध्यम से जवाब माँगने पर पीड़ित लियाक़त अली को बेसिक शिक्षा विभाग ने पत्र भेजकर भारतीय जीवन बीमा निगम अलीगढ़ से सामुहिक बीमा धनराशि का भुगतान किया। स्थायी लोक अदालत की दो सदस्यीय पीठ प्रभारी अध्यक्ष शाज़िया सिद्दीकी व डॉक्टर मीना बंसल ने सुलह समझौते के माध्यम से वाद का निपटारा किया।






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