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अलीगढ़ से कैलाश यात्रा को जत्था रवाना,भगवान शिव-पार्वती का निवास है कैलाश: स्वामी पूर्णानंदपुरी

Published: June 13, 2019 at 11:11 pm

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वीपीएल न्यूज़, अलीगढ़- कैलाश मानसरोवर की इस वर्ष की यात्रा मंगलवार से प्रारंभ हो गई। सरकारी एवं निजी संस्थाओं द्वारा प्रतिवर्ष अनेकों शिव भक्त अपने आराध्य भगवान शिव के दर्शन को जाते है। इसी क्रम में वर्ष 2017 में कैलाश यात्रा कर चुके महामंडलेश्वर स्वामी पूर्णानंदपुरी जी महाराज ने अलीगढ से जाने वाले शिव भक्तों को कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुडी विभिन्न जानकारी देते हुए एवं भगवान् शिव की पूजा अर्चना करने के पश्चात जत्थे को शुभकामनाओं के साथ विदाई दी।

गुरुवार को कैलाश मानसरोवर यात्रा रवानगी से पूर्व शिवभक्त अजय मित्रमंडल, संजय यादव की अध्यक्षता में नौ दलीय जत्थे द्वारा खेरेश्वर महादेव मंदिर पर महामंडलेश्वर स्वामी पूर्णानंदपुरी की अध्यक्षता में आचार्य गौरव शास्त्री, ऋषि शास्त्री, रवि शास्त्री, वैभव वेदपाठी, दुष्यंत वेदपाठी आदि पंचाचार्यों ने भगवान् शिव परिवार का दूध, दही, घी, शहद, बूरा, पंचामृत आदि से स्नान करवाया तत्पश्चात भगवान् शिव को बिल्बपत्र, शमीपत्र, दूर्वा, तुलसी मंजरी, भांग, धतूरा फल अर्पित किये।

इस अवसर पर परमपूज्य महाराज श्री ने अपनी यात्रा की स्मृति साझा करते हुए भगवान् शिव के पवित्र धाम कैलाश की अविश्वसनीय वर्णन बताते हुए कहा कि हिमालयात् समारभ्य यावत् इन्दु सरोवरम्। तं देवनिर्मितं देशं हिन्दुस्थान प्रचक्षते॥ हिमालय से प्रारंभ होकर इन्दु सरोवर (हिन्द महासागर) तक यह देव निर्मित देश हिन्दुस्थान कहलाता है। कैलाश मानसरोवर : कैलाश पर्वत और मानसरोवर को धरती का केंद्र माना जाता है। यह हिमालय के केंद्र में है। मानसरोवर वह पवित्र जगह है, जिसे शिव का धाम माना जाता है। मानसरोवर के पास स्थित कैलाश पर्वत पर भगवान शिव साक्षात विराजमान हैं। यह हिन्दुओं के लिए प्रमुख तीर्थ स्थल है। संस्कृत शब्द मानसरोवर, मानस तथा सरोवर को मिल कर बना है जिसका शाब्दिक अर्थ होता है- मन का सरोवर जिसमे स्नान मात्र से मनुष्य के जन्म जन्मांतर में किये समस्त पापों का विनाश होता है।

उन्होंने यात्रियों को सलाह दी कि वे जत्थे के साथ जाने वाले संपर्क अधिकारियों की सुरक्षा सलाह का पूरी तरह से पालन करें। उन्होंने कहा कि यात्रा का मार्ग जितना कठिन है, उतना ही मनोरम भी है। यात्रियों को निश्चित रूप से यात्रा में उनकी कल्पना से कहीं अधिक रोमांचकारी एवं आध्यात्मिक अनुभव की प्राप्ति होगी।

इस अवसर पर आचार्य गौरव शास्त्री सहित सभी कैलाश यात्रिओं ने भगवान शिव से समस्त शिवभक्तों की यात्रा पूर्णत: सुरक्षित और अद्वितीय आध्यात्मिक अनुभव से परिपूर्ण होने की मनोकामना की। जत्थे के निर्देशक ने भगवान् शिव के आशीर्वाद के पश्चात महामंडलेश्वर स्वामी पूर्णानंदपुरी से आशीर्वाद प्राप्त करते हुए बताया कि यह यात्रा खेरेश्वर महादेव मंदिर से प्रारंभ होकर नई दिल्ली से काठमांडू स्थित पशुपतिनाथ तत्पश्चात भगवान शिव के पवित्र धाम कैलाश को रवाना होगी।