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एएमयू रिसर्च स्कालर शहनाज़ रहमान साहित्य अकादमी के “युवा पुरस्कार” से सम्मानित

Published: October 27, 2018 at 8:32 pm

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वीपीएल न्यूज़, इम्फाल/अलीगढ़- साहित्य अकादमी की ओर से इम्फाल में आयोजित सम्मान समारोह में जारी वर्ष के ‘युवा पुरस्कार’ में उर्दू के लिए शहनाज़ रहमान को सम्मानित किया गया। ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑडीटोरियम में आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन मोमेन्टो और पचास हजार के चेक सहित ये पुरस्कार प्रसिद्ध हिन्दी लेखक और साहित्य अकादमी के उपाध्यक्ष माधव कौशिक के हाथों दिया गया।

मुख्य अतिथि और अंग्रेजी की प्रसिद्ध लेखक एस्थर्ड डेविड ने शाल और गुलदस्ता देकर सभी पुरस्कृत लेखकों का स्वागत किया। साहित्य अकादमी के उपाध्यक्ष ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि हर व्यक्ति अपनी योग्यता के हिसाब से अपना काम चुनता है लेकिन लेखन एक ऐसा काम है जिसका चयन प्रकृति करती है, युवा लेखकों में इच्छा और आकांक्षा होती है कि समाज की कुरीतियों को समाप्त करें, हमारे सामने इस समय पूरे भारत के युवा लेखक उपस्थित हैं। इन्होंने भारत की बदलती हुई सोच और समाज को अपनी पुस्तकों में समाहित किया है।

उन्होंने आगे कहा हमारे समय में संसाधन की कमी थी लेकिन इस समय इंटरनेट की क्रान्ति के कारण संसाधन का खजाना हमारे सामने है, इसलिए नौजवान लेखकों की जिम्मेदारियां और बढ़ जाती हैं।

मुख्य अतिथि एस्टर्ड डेविड ने अपने भाषण में कहा कि ये युवा लेखक भारतीय साहित्य का उज्ज्वल भविष्य हैं। अच्छा लेखक समाज का चिकित्सक होता है चाहे वह किसी भी भाषा का हो, उदाहरण के तौर पर इस्मत चुग्ताई ने महिलाओं के अधिकारों और समस्याओं की बात अपनी कहानियों में की और उन कहानियों के अनुवाद के द्वारा दूसरी भाषाओं के लोग भी प्रभावित हुए और वह भी महिला अधिकारों और समस्याओं की बात करने लगे।

साहित्य अकादमी के सचिव के. श्रीनिवास राव ने प्रोग्राम के उद्घाटन के अवसर पर पुरस्कृत लेखकों को बधाई दी और साहित्य अकादमी की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर पुरस्कृत लेखकों की रचनाओं व साहित्यिक यात्रा पर आधारित सुवेनियर का विमोचन भी हुआ।

देश की 22 भाषाओं में दिये जाने वाले इस पुरस्कार की घोषणा जून के महीने में की गयी थी। शहनाज़ रहमान को ये पुरस्कार उनके कहानी संग्रह ‘नेरंग-ए-जुनूं’ पर दिया गया। ‘नेरंग-ए-जुनूं’ से पहले 2016 में उनके आलोचनात्मक लेख संग्रह ‘उर्दू फिक्शन : तफहीम ताबीर और तन्कीद’ भी प्रकाशित हो चुका है। इसके अलावा देश-विदेश की प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में उनकी रचनाएं और लेख प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने जारी वर्ष के मई के महीने में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से ‘एनालिटिकल एण्ड क्रिटिकल स्टडी ऑफ द प्रेक्टिकल क्रटिसिज़्म ऑफ उर्दू शॉर्ट स्टोरीज़’ विषय पर अपनी रिसर्च पूरी की है।

शहनाज़ रहमान का संबंध पूर्वी उत्तर प्रदेश के जनपद सिद्धार्थनगर से है। उन्होंने प्रारभिक शिक्षा जामिया अलफलाह आजमगढ़ से प्राप्त की। इसके बाद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा की प्राप्त की। कहानी लेखन के लिए शहनाज़ रहमान को वर्ष 2017 में ‘प्रो0 शमीम निकहत अवार्ड’ से सम्मानित किया जा चुका है। उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी से ‘उर्दू फिक्शनः तफहीम ताबीर और तन्कीद’ पर और बिहार उर्दू अकादमी से ‘नेरंग-ए-जुनूं’ पर भी इनाम मिल चुका है। ज्ञात हो कि अब तक इस पुरस्कार से सम्मानित शहनाज़ रहमान पहली महिला हैं जिन्हें ये प्रतिष्ठित पुरस्कार दिया गया है।

शहनाज़ रहमान की इस उपलब्धि पर ए.एम.यू. उर्दू विभागाध्यक्ष प्रो0 तारिक छतारी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि बेहद खुशी की बात है कि विभाग की किसी शोध छात्रा को साहित्य अकादमी का ये प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हुआ। इससे दूसरे छात्रों और शोधार्थियों को अपनी रचनात्मक व आलोचनात्मक क्षमताओं को आगे बढ़ाने में प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने कहा की ये संतुष्टि की बात है कि नये लेखक रचनात्मक क्षेत्र में पूरे आत्मविश्वास के साथ आ रहे हैं इसलिए उम्मीद की जा सकती है कि आने वाले कुछ वर्षों में उर्दू फिक्शन विश्वसनीय हाथों में होगा।

शहनाज़ रहमान की इस कामयाबी पर ए.एम.यू. के उर्दू विभाग के शिक्षकों प्रो0 मो0 ज़ाहिद, प्रो0 सैय्यद मो0 अमीन, प्रो0 सैय्यद मो0 हाशिम, प्रो0 महताब हैदर नक़वी, प्रो0 क़मरुलहुदा फरीदी, प्रो0 ज़फर अहमद सिद्दीकी, प्रो0 मो0 अली जौहर, प्रो0 शहाबुद्दीन साक़िब, प्रो0 सैय्यद सिराज अजमली, प्रो0 मौला बख्श, प्रो0 नीलम फ़रज़ाना, डा0 राशिद अनवर राशिद, डा0 खालिद सैफुल्ला, डा0 मुईदुर्रहमान, डा0 मुश्ताक़ सदफ़ के अलावा विभाग के अवकाशप्राप्त शिक्षकों प्रो0 काज़ी जमाल हुसैन, प्रो0 अकील अहमद सिद्दीकी, प्रो0 अबुल कलाम कासमी और प्रो0 सग़ीर अफ्राहीम ने भी प्रसन्नता व्यक्त की है और विभाग की रिसर्च छात्रा को इस प्रतिष्ठित पुरस्कार की बधाई दी है।






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