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बुधवार से प्रारम्भ होंगे शारदीय नवरात्र : महामंडलेश्वर डा. ब्रजेश शास्त्री

Published: October 9, 2018 at 6:37 pm

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वीपीएल न्यूज़, अलीगढ़- आश्विन शुक्ल प्रतिपदा के दिन शारदीय नवरात्र का आरंभ होता है। नवरात्र के पहले दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापित करने के बाद नवग्रहों, पंचदेवता, ग्राम और नगर देवता की पूजा के बाद विधि-विधान से माता की पूजा करनी चाहिए। ऐसी मान्यता है कि मंगल कलश की स्थापना से नवरात्र में देवी पूजन सफल और फलदायक होता है। यह जानकारी वैदिक ज्योतिष संस्थान के अध्यक्ष डा.आचार्य ब्रजेश शास्त्री ने दी।

शास्त्री जी ने बताया कि इस बार 10 अक्टूबर बुधवार से शारदीय नवरात्र का आरम्भ हो रहा है। शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करने से अत्यधिक पुण्य की प्राप्ति होती है।कलश स्थापित करने का सबसे उत्तम मुहूर्त सुबह 06 बजकर 20 मिनट से 7 बजकर 25 मिनट तक है। दोपहर में अभिजित मुहूर्त 11 बजकर 51 मिनट से लेकर 12 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। इस दौरान नवरात्र पूजन के लिए कलश स्थापित किया जा सकता है। सुबह 7 बजकर 25 मिनट तक ही प्रतिपदा तिथि है। इसके बाद द्वितीया तिथि लग जाएगी लेकिन सूर्योदय के समय प्रतिपदा तिथि रहने के कारण द्वितीया तिथि को क्षय माना जाएगा, अतः पूरे दिन प्रतिपदा तिथि ही मान्य रहेगी। ऐसे में घट स्थापना के लिए सबसे उत्तम समय प्रातः 7 बजकर 25 मिनट तक है।

बुधवार को सूर्योदय बाद 2 घड़ी 18 पल तक ही प्रतिपदा तिथि है। फिर भी शास्त्रों के नियमानुसार सूर्योदय व्यापिनी प्रतिपदा होने से बुधवार को ही नवरात्र आरंभ हो रहा है। बुध को व्यापार, बुद्धि और ज्ञान का कारक ग्रह माना जाता है। ऐसे में इस वर्ष नवरात्र को व्यापार में प्रगति के लिए अच्छा माना जा रहा है। छात्रों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए भी नवरात्र का बुधवार के दिन आरंभ शुभ फलदायी है।

कलश स्थापन विधि के बारे में जानकारी देते हुए शास्त्री जी ने बताया कि कलश स्थापित करने वाले को सबसे पहले पवित्र होने के मंत्र- ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥ इस मंत्र से स्वयं को और पूजन सामग्रियों को पवित्र कर लेना चाहिए। इसके बाद दाएं हाथ में अक्षत, फूल और जल लेकर दुर्गा पूजन का संकल्प करना चाहिए। माता की मूर्ति के सामने कलश को मिटटी या बालू के ऊपर रखकर हाथ में चावल, फूल, गंगाजल लेकर वरुण देवता का आह्वाहन करके कलश में सर्वौषधि एवं पंचरत्न डालकर कलश के नीचे पड़ी बालू या मिटटी में सप्तधान्य मिलाएं। आम या अशोक के पत्ते कलश में डालकर कलश के ऊपर एक अनाज से भरा हुआ पात्र रखकर नारियल रखें तत्पश्चात नारियल के ऊपर लाल वस्त्र अर्पित करें।





बुधवार से प्रारम्भ होंगे शारदीय नवरात्र : महामंडलेश्वर डा. ब्रजेश शास्त्री

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