Menu

माता पिता द्वारा दिए आचरण ही करते बच्चे का जीवन निर्माण : मुरलिका शर्मा

Published: October 8, 2018 at 8:31 pm

nobanner
Print Friendly, PDF & Email




वीपीएल न्यूज़, अलीगढ़- सिद्धि जिसे भी मिली है उसका मूल कारण दैन्य ही रहा है। कई प्रहर तक स्वर्ण वर्षा कराने के पश्चात भी नरसी को कभी अहंकार नहीं हुआ। यही कारण था की भगवान् उनकी हर इच्छा पूरी किया करते थे। सामाजिक चरित्र का उन्नयन इसे ही महापुरुषों के चरित्र एवं उनके मनन से ही संभव है। आज का मानव केवल अहंकार में जीता है और मेरा मेरा करते हुए अनेक आपत्तियों का शिकार हो जाता है। यह उदगार ब्रजदेवी साध्वी मुरलिका ने अलीगढ में हो रही भक्तमाल कथा के अंतर्गत नरसी चरित्र का व्याख्यान करते हुए दिए।

महामंडलेश्वर डा. आचार्य ब्रजेश शास्त्री के सानिध्य में गूलर रोड स्थित लक्ष्मी टाकीज के सामने चल रहे सप्तदिवसीय श्री भक्तमाल कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव आयोजन के सातवें दिन व्रजबालिका मानमंदिर वासिनी मुरलिका शर्मा ने भगवान के भक्त नरसी के चरित्र का बखान किया। कथा से पूर्व मुख्य यजमान अशोक कुमार वार्ष्णेय एवं चित्रा वार्ष्णेय, अरुण कुमार वार्ष्णेय नीलम वार्ष्णेय द्वारा गौरव शास्त्री ऋषि शास्त्री ने कथापीठ का पूजन अर्चन करवाया।

कथा के माध्यम से मुरलिका शर्मा ने बताया कि भारत भूमि अनेक संतों-महात्माओं की जननी रही है। भारत के हर प्रांतों में अनेका नेक संतों ने जन्म लिया है। ऐसे संतों में एक गुजरात प्रांत में जूनागढ़ नामक नगर में बड़ नगरा जाति के नागर ब्राह्मण परिवार में जन्मे संत नरसी मेहता जो भगवान् की भक्ति में हमेशा लीन रहा करते थे। एक दिन उद्विग्न मन वाले नरसी भाभी के घर का त्याग करके वन की ओर चले गए। रास्ते में एक अपूज शिवालय के पास पहुंच गए। पूजा-ध्यान में कई रात और दिन बीतते चले गए। सात दिन के उपवास के बाद शंकर भगवान ने प्रसन्न होकर दर्शन दिए।

भगवान शंकर ने उनको कुछ वरदान मांगने को कहा। नरसी ने सुख-सम्पत्ति न मांग कर भगवान विष्णु के दर्शन की अभिलाषा व्यक्त की। यह सुनकर शंकर अधिकाधिक प्रसन्न हुए। स्वयं महादेव जी हाथ पकड़कर उनको बैकुंठ में ले गए। वहां कृष्ण की रास लीला देखकर उनका दिल परिपूर्ण हो गया।शंकर जी ने लोकाचार छोड्कर उनको भगवद्भक्ति में लीन होने की प्रेरणा दी क्योंकि भक्ति से भवसागर पार करना सरल है। पलभर में स्वप्नवत यह सारा देवदृश्य अदृश्य हो गया।शंकर भगवान भी अंतर्धान हो गए।

अंत में श्री मती शुशीला देवी, अशोक कुमार चित्रा गुप्ता, अरूण कुमार, नीलम गुप्ता, जितेन्द्र गुप्ता,कृष्णा गुप्ता,शशांक गुप्ता, भानुजा, राजेन्द्र कुमार, महेश चन्द्र, शैलेन्द्र कुमार, कपिल शर्मा, निर्मल गुप्ता,मिथ्लेश शर्मा,महन्त ओ पी बाबा, पवन कुमार वार्ष्णेय, महेन्द्र सिंह,धीरेन्द्र पाल सिंह, बन्टी भैया आदि ने महाआरती की।






Leave a Comment

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>