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सद्गुणों का संग ही सत्संग है : आचार्य संजीव रूप जी

Published: November 15, 2017 at 6:56 pm

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वीपीएल न्यूज़, अलीगढ़ 15 नवम्बर- वेद प्रचार समिति के द्वारा रामघाट रोड स्थित क्वार्सी बिजलीघर के निकट वेदकथा की अमृत वर्षा का भव्य आयोजन किया गया। जिसमें प्रात 6 से 7 बजे तक योगा प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उसके पश्चात् प्रात 9 से 11 बजे तक वैदिक पंचकुण्डीय यज्ञ का आयोजन किया गया। वैदिक पंचकुण्डीय महायज्ञ में सैकड़ों धर्मप्रेमियों ने आहूतियां प्रदान कीं।

पंचकुण्डीय महायज्ञ परम पूज्य आचार्य संजीव रूप जी ने वेदों द्वारा मंत्रोचर करके सम्पन्न कराया। जिसमें आचार्य संजीव रूप में यज्ञ कराते हुए दक्षिणा में यजमानों से बुराइयां छोड़ने का आवाहन किया। वेदकथा के तीसरे दिन कथा का शुभारंभ व्यास पीठ के आरती उतारकर वेद प्रचार समिति के अध्यक्ष मनोज शर्मा ‘शैली’ एवं महासचिव राजेन्द्र सिंह ने किया।

कथा व्यास परम पूज्य आचार्य संजीव रूप जी ने कहा कि समाज में भक्ति के नाम पर, धर्म के नाम पर भारी घोटाला चल रहा है। नाना प्रकार के मतावलंबी, धर्माधिकारी संत का चोला ओढ़कर लोगों को कुपथ ही दिखा रहे हैं। संत तो सुधारक होते हैं, इसलिए संतों को सदा समाज को सत्य का मार्ग दिखाना चाहिए। आज भक्ति के नाम पर भारी लूटपाट मची हुई है, भगवान से लोग केवल अपनी कामनाओं की पूर्ति के लिए जुड़ते हैं। यदि कामना पूरी न हो तो वह भगवान की पूजा भी छोड़ देते हैं, भगवान भी बदल देते हैं। समाज में जातिवाद, छुआछूत, भ्रष्टाचार अनाचार, दुराचार इसीलिए बढ़ रहा है कि लोगों को ईश्वर से जुड़ना नहीं आया और ना ही संत ईश्वर से जुड़ने का ज्ञान दे पाए।

उन्होंने कहा कि ईश्वर की भक्ति का, सत्संग का, भजन का एक ही अर्थ है कि हमारा जीवन पवित्र हो। हम अहिंसक हो, सत्यवादी हो, सदाचारी हो, इमानदार हो, अपने राष्ट्र के एक जिम्मेदार सशक्त पहरेदार हों। चरित्रवान हों। यदि भक्ति में जाकर के व्यक्ति शुद्ध और पवित्र आचरण वाला नहीं होता तो समझो वह भक्ति में गया ही नहीं। उन्होंने कहा कि सद्गुणों का संग ही सत्संग है। इसलिए व्यक्ति को प्रयत्न करके अपने जीवन को सद्गुणों से सुभाषित करना चाहिए। आज की कथा में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे सैकड़ों की संख्या में स्त्रियों और पुरुषों ने वेद कथा की अमृत वर्षा का आनंद लिया।

कार्यक्रम में मनोज शर्मा ‘शैली’, राजेन्द्र सिंह, सुषमा सिंह, वन्दना सिंह, बी.पी.शर्मा, बलवेन्द्र कुमार ‘बबलू ठेकेदार’, अनिता राज, प्रेमपाल सिंह, ठा.भूपेन्द्र सिंह, भानू प्रताप सिंह, बनी सिंह, जगदीश कुमार, नीरज कुमार, डा.सुनील चौहान, संजीव कुमार, भूदेव शर्मा, मनेन्द्र प्रताप सिंह, डा.राजकुमार सिंह राघव आदि उपस्थित थे।




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