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अहोई अष्टमी गुरुवार को, राधा कुंड में स्नान करने से होती है संतान की प्राप्ति : ब्रजेश शास्त्री

Published: October 11, 2017 at 9:35 pm

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वीपीएल न्यूज़, अलीगढ़- करवा चौथ और अहोई अष्टमी महिलाओं के दो विशेष पर्व हैं। इन पर्वों को मनाते हुए भारतीय महिलाएं जहां पौराणिक रीतिपूर्वक व्रत-उपवास करती हैं। वहीं सांस्कृतिक उमंग द्वारा उत्सव का रूप भी प्रदान करती हैं। इस बार अहोई अष्टमी 12 अक्टूबर गुरुवार को है। इन दोनों उत्सवों में जहां परिवार के कल्याण की भावना निहित होती है। वहीं सास के चरणों को तीर्थ मानकर उनसे आशीर्वाद लेने की प्राचीन परंपरा आज भी दिखाई देती है। यह जानकारी वैदिक ज्योतिष संस्थान के आचार्य कैलाशी डा ब्रजेश शास्त्री ने दी।

उन्होंने आगे बताया कि तारों की छाँव की पूजा सायं 5 बजकर 51 मिनट से 7 बजकर 28 मिनट तक तथा चन्द्रमा छाया में पूजा रात्री 11 बजकर 51 मिनट से करे। वहीं दूसरी ओर आचार्य डा ब्रजेश शास्त्री ने बताया कि अगर शादी के कई साल बाद भी आपके आंगन में बच्चे की किलकारी नहीं गूंजी है तो गोवर्धन गिरिधारी की परिक्रमा मार्ग में पड़ने वाले राधा कुंड में अगर नि:संतान दंपति, एक साथ स्नान करें तो उनके घर बच्चे की किलकारी गूंज सकती है। यहां महिलायें अपने केश खोलकर राधा जी से संतान का वरदान मांगती हैं। राधाकुंड में भगवान श्रीकृष्ण ने, अष्ट सखियों संग महारास रचाया था। यह कुंड राधा जी ने अपने कंगन से खोदा था। राधाकुंड के बगल में ही श्रीकृष्ण कुंड है जिसकी बनावट बिल्कुल श्रीकृष्ण की तरह बांकी यानि 3 जगह से टेढ़ी है।

ब्रजेश शास्त्री के अनुसार एक बार गोवर्धन में गाय चराने के दौरान अरिष्टासुर नाम के गाय के बछड़े ने श्रीकृष्ण पर हमला कर दिया था। तब भगवान ने उस बछ़ड़े का वध किया। राधा जी इसी बात से नाराज हो गईं क्योकि अरिष्टासुर नाम का राक्षस बछड़े का वेश धर कर आया था। लेकिन कान्हा ने एक बछड़े का वध किया था। उन पर गोवंश हत्या का पाप लगा था। इस पाप से प्रायश्चित के लिए राधा जी ने सारे तीर्थों का जल एक कुंड में लाने को कहा। तब श्रीकृष्ण ने अपनी बांसुरी से यह कुंड खोदा था। राधा जी ने भी अपने कंगन से राधा कुंड खोदा। फिर राधा कृष्ण ने इसी कुंड में स्नान किया था, तथा अष्ट सखियो संग महारास किया। महारास से प्रसन्न होकर राधा जी ने श्रीकृष्ण को वरदान दिया कि जो भी अहोई अष्टमी की रात राधा और कृष्ण कुंड में स्नान करेगा उसके घर साल भर के अंदर ही संतान की किलकारी गूंजेगी। राधाकुंड में घुटने से ज्यादा जल में खड़े होकर, राधा कृपा आशीर्वाद कटाक्ष का 100 बार पाठ करने से भी, सभी सांसारिक इच्छायें बहुत जल्दी पूरी हो जाती हैं।




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